बरसात का मौसम और ज्यादा उमस गन्ने की फसल के लिए खतरा बन सकती है। इस समय खेतों में नमी बढ़ने से एक खतरनाक कीट तेजी से फैलता है जिसे मिलिबग कहते हैं। यह कीट गन्ने का रस चूसकर फसल की बढ़वार रोक देता है और पैदावार घटा देता है। समय रहते पहचान और सही दवा से किसान अपनी फसल बचा सकते हैं।
मिलिबग क्या है और क्यों बढ़ता है बरसात में
मिलिबग एक छोटा सा कीट है जो गन्ने की पत्तियों और तने की गांठों के पास छिपकर रहता है। इसका शरीर गुलाबी या सफेद रूई जैसा दिखता है। बरसात और उमस वाले मौसम में नमी ज्यादा होने से यह कीट तेजी से बढ़ता है। खेत में खरपतवार, ज्यादा नाइट्रोजन खाद और पुरानी सूखी पत्तियां रहने से भी इसका प्रकोप बढ़ जाता है। जुलाई-अगस्त में यह समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिलती है।
यह कीट पौधे का रस चूसता है जिससे गन्ने की बढ़त रुक जाती है। पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और तने पर चिपचिपा पदार्थ निकलता है। इस पदार्थ पर काली फफूंद जम जाती है जिससे पौधा कमजोर हो जाता है।
लक्षण कैसे पहचानें
गन्ने में मिलिबग का असर आसानी से देखा जा सकता है। पत्तियों के नीचे या गांठों पर सफेद-गुलाबी कीड़े दिखें तो सतर्क हो जाएं। पत्तियां पीली और मुड़ी हुई नजर आने लगती हैं। तने पर काला धब्बा या चिपचिपापन भी एक बड़ा संकेत है। ज्यादा प्रकोप होने पर गन्ने की वृद्धि रुक जाती है और उपज कम हो सकती है।
खेत का नियमित निरीक्षण जरूरी है। खासकर उन जगहों पर ध्यान दें जहां पत्तियां सूखी हों या पौधे कमजोर दिख रहे हों। जल्दी पकड़ लेने से नुकसान कम होता है।
रोकथाम के आसान तरीके
फसल बचाने के लिए पहले से कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। खेत की साफ-सफाई सबसे जरूरी है। सूखी पत्तियों को हटा दें और खरपतवार साफ रखें। पानी का जमाव न होने दें क्योंकि ज्यादा नमी कीट को बढ़ावा देती है। नाइट्रोजन खाद का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें। स्वस्थ और कीट-मुक्त बीज का इस्तेमाल करें। कुछ किस्में इस कीट से बेहतर तरीके से लड़ती हैं, इसलिए स्थानीय सलाह लेकर किस्म चुनें।
प्राकृतिक दुश्मनों जैसे कुछ भृंग और परजीवी कीटों को बढ़ावा देने से भी मिलिबग नियंत्रित रहता है। नीम आधारित घोल का इस्तेमाल शुरुआती अवस्था में फायदेमंद रहता है।
मिलिबग की दवा और छिड़काव का तरीका
जब प्रकोप दिख जाए तो सही दवा का छिड़काव जरूरी हो जाता है। प्रभावित पत्तियों की शीथ हटाकर अलग कर दें। फिर दवा का छिड़काव करें।
- इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल को 0.3 से 0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें
- थायमेथोक्साम 25 डब्ल्यूजी 0.2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से इस्तेमाल करें
- डाइमेथोएट 30 ईसी को उचित मात्रा में पानी के साथ मिलाकर स्प्रे करें
- जरूरत पड़ने पर क्लोरपायरीफॉस का सावधानी से प्रयोग करें
छिड़काव सुबह या शाम को करें जब धूप तेज न हो। दवा को अच्छी तरह मिलाएं और तने तथा पत्तियों के नीचे वाले हिस्से पर ध्यान दें। 10 से 15 दिन बाद जरूरत पड़ने पर दोबारा छिड़काव किया जा सकता है। साथ में स्टिकर मिलाने से दवा बेहतर चिपकती है।
जैविक और घरेलू उपाय भी अपनाएं
रासायनिक दवा के अलावा जैविक तरीके भी कारगर हैं। नीम तेल का 0.5 से 1 प्रतिशत घोल बनाकर छिड़काव करें। साबुन और तेल का घोल भी शुरुआती प्रकोप में मदद करता है। तीन चम्मच खाना पकाने का तेल और आधा चम्मच डिटर्जेंट चार लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे किया जा सकता है। लेडी बर्ड बीटल जैसे प्राकृतिक दुश्मन छोड़ने से भी कीट कम होते हैं।
ये उपाय पर्यावरण के अनुकूल हैं और मिट्टी की सेहत भी बिगाड़ते नहीं।
फसल की देखभाल और अतिरिक्त सावधानी
दवा के साथ-साथ खेत की नियमित देखभाल जरूरी है। जल निकासी ठीक रखें ताकि उमस ज्यादा न बने। प्रभावित पौधों को अलग करके नष्ट करें ताकि कीट दूसरे पौधों में न फैले। रatoon फसल में खास ध्यान दें क्योंकि उसमें प्रकोप ज्यादा हो सकता है। खाद और सिंचाई संतुलित रखें ताकि पौधा मजबूत रहे और कीट का असर कम हो।
समय पर कदम उठाने से उपज का नुकसान काफी हद तक रोका जा सकता है।
बरसात और उमस के इस मौसम में मिलिबग से बचने के लिए सतर्कता सबसे बड़ी दवा है। खेत की नियमित जांच, साफ-सफाई और सही समय पर दवा का छिड़काव करके किसान अपनी गन्ने की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं। जल्दी कार्रवाई से नुकसान कम होता है और पैदावार अच्छी मिलती है।


