धान की फसल में अच्छी पैदावार के लिए शुरुआत से ही पौधों की सही बढ़वार और पर्याप्त कल्ले बनना बहुत जरूरी है। पहली टॉप ड्रेसिंग खाद का समय और उसमें दिए जाने वाले पोषक तत्व इस बात पर बड़ा असर डालते हैं कि खेत में पौधे कितने मजबूत होंगे और कितने प्रभावी कल्ले बनेंगे।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार धान में नाइट्रोजन की खाद को एक साथ देने के बजाय फसल की जरूरत के अनुसार अलग-अलग चरणों में देना अधिक उपयोगी माना जाता है। कल्ले निकलने की अवस्था पहली टॉप ड्रेसिंग के लिए महत्वपूर्ण समय होती है।
धान में पहली खाद कब डालनी चाहिए
धान की रोपाई वाली फसल में पहली टॉप ड्रेसिंग सामान्य तौर पर सक्रिय कल्ले निकलने की अवस्था में की जाती है। केवल कैलेंडर के हिसाब से खाद डालने के बजाय फसल की अवस्था देखना अधिक सही तरीका है, क्योंकि रोपाई की तारीख, किस्म, मिट्टी, मौसम और खेत की स्थिति के अनुसार समय बदल सकता है।
इस समय पौधों में नई पत्तियां निकलने के साथ कल्ले बनना शुरू होते हैं। नाइट्रोजन की पर्याप्त उपलब्धता पौधे की हरी बढ़वार और कल्ले बनने में मदद करती है। हालांकि जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देने से फसल में अनावश्यक नरम बढ़वार हो सकती है और कुछ परिस्थितियों में कीट तथा रोग का जोखिम भी बढ़ सकता है।
सीधी बुवाई वाले धान में भी नाइट्रोजन को किस्तों में देना बेहतर माना जाता है। इसलिए पहली खाद का सही समय खेत की स्थिति और अपनाई गई खेती की पद्धति के अनुसार तय करना चाहिए।
पहली खाद में क्या देना चाहिए
धान की पहली टॉप ड्रेसिंग में मुख्य रूप से नाइट्रोजन की जरूरत होती है। खेत में यूरिया का इस्तेमाल इसी नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए किया जाता है। लेकिन हर खेत में यूरिया की एक जैसी मात्रा देना सही नहीं है। मिट्टी की उर्वरता, पहले दी गई बेसल खाद, धान की किस्म और स्थानीय अनुशंसा को ध्यान में रखकर मात्रा तय करनी चाहिए।
कृषि संबंधी सलाह में धान के लिए नाइट्रोजन को विभाजित मात्रा में देने पर जोर दिया जाता है। कुछ परिस्थितियों में नाइट्रोजन की एक प्रमुख मात्रा कल्ले निकलने की अवस्था में टॉप ड्रेसिंग के रूप में दी जाती है। मिट्टी की जांच के आधार पर खाद प्रबंधन करना सबसे बेहतर तरीका है।
पहली खाद के समय इन बातों का ध्यान रखें:
- मुख्य रूप से नाइट्रोजन की जरूरत के अनुसार यूरिया या अनुशंसित नाइट्रोजन उर्वरक दिया जाता है।
- फास्फोरस की पूरी मात्रा सामान्यतः बेसल खाद के रूप में पहले देने की सलाह दी जाती है, इसलिए पहली टॉप ड्रेसिंग में बिना जरूरत डीएपी डालना उचित नहीं है।
- पोटाश की जरूरत और उसकी मात्रा मिट्टी जांच तथा स्थानीय सिफारिश के अनुसार तय करनी चाहिए।
- जिंक या अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होने पर ही संबंधित पोषक तत्व की अनुशंसित मात्रा का इस्तेमाल करना चाहिए।
धान में ज्यादा कल्ले कैसे बढ़ाएं
धान में कल्ले बढ़ाने के लिए केवल यूरिया की मात्रा बढ़ाना सही तरीका नहीं है। अच्छी कल्ले संख्या के लिए पौधों को संतुलित पोषण, पर्याप्त जगह, सही जल प्रबंधन और खरपतवार नियंत्रण की जरूरत होती है।
अगर खेत में खरपतवार तेजी से बढ़ रहे हैं तो वे धान के पौधों के साथ पोषक तत्वों, पानी और जगह के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। ऐसी स्थिति में केवल ज्यादा खाद डालने से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते।
धान की फसल में अच्छे कल्ले बढ़ाने के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि पौधों को शुरुआती बढ़वार के दौरान पर्याप्त पोषण मिले और खेत में अनावश्यक रूप से लगातार पानी भरा न रहे। खेत की परिस्थिति के अनुसार पानी का प्रबंधन करने से जड़ों को बेहतर वातावरण मिलता है और पौधों की बढ़वार संतुलित रहती है।
पहली खाद डालते समय खेत की स्थिति कैसी हो
टॉप ड्रेसिंग करते समय खेत में बहुत ज्यादा पानी भरा होना खाद के उपयोग को प्रभावित कर सकता है। इसलिए खाद डालने से पहले खेत की जल स्थिति को स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार व्यवस्थित करना चाहिए। खाद को पौधों के आसपास समान रूप से फैलाना जरूरी है ताकि एक जगह अधिक और दूसरी जगह कम पोषक तत्व न पहुंचे।
खरपतवार से अधिक प्रभावित खेत में पहले खरपतवार नियंत्रण पर ध्यान देना भी जरूरी है। हाल की कृषि सलाह में भी प्रभावी खरपतवार नियंत्रण को उर्वरक उपयोग की दक्षता से जोड़ा गया है, क्योंकि खरपतवार फसल के पोषक तत्वों का बड़ा हिस्सा उपयोग कर सकते हैं।
ज्यादा यूरिया डालने से कल्ले ज्यादा नहीं बढ़ेंगे
कई किसान अधिक कल्ले लेने के लिए पहली खाद में यूरिया की मात्रा बढ़ा देते हैं। यह तरीका हमेशा लाभदायक नहीं होता। धान को जितनी नाइट्रोजन की जरूरत है, उससे अधिक देने पर पौधे की अनावश्यक हरी बढ़वार हो सकती है और संतुलित पोषण बिगड़ सकता है।
नाइट्रोजन का सही उपयोग मिट्टी की स्थिति और फसल की वास्तविक जरूरत के आधार पर करना चाहिए। धान में नाइट्रोजन की जरूरत का आकलन करने के लिए लीफ कलर चार्ट जैसी विधियों का भी उपयोग किया जाता है। इससे बिना जरूरत अतिरिक्त नाइट्रोजन डालने से बचने में मदद मिल सकती है।
इसी तरह डीएपी और यूरिया को हर अवस्था में एक जैसा डालना भी सही पोषण प्रबंधन नहीं है। फसल को नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और जरूरत के अनुसार अन्य पोषक तत्व संतुलित रूप से मिलने चाहिए।
धान में कल्ले बढ़ाने के लिए सबसे जरूरी बात
धान में अच्छे कल्ले तभी बनेंगे जब शुरुआत से पौधों की बढ़वार संतुलित रहे। पहली टॉप ड्रेसिंग का उद्देश्य केवल खेत को हरा करना नहीं, बल्कि फसल की जरूरत के समय सही मात्रा में पोषण उपलब्ध कराना है।
इसलिए पहली खाद डालते समय सबसे पहले यह देखें कि धान किस अवस्था में है, पहले कौन-कौन सी खाद दी जा चुकी है और मिट्टी में किस पोषक तत्व की जरूरत है। केवल दूसरे किसान के खेत में इस्तेमाल हुई यूरिया की मात्रा देखकर अपने खेत में वही मात्रा डालना उचित नहीं है।
निष्कर्ष
धान में पहली खाद का सबसे महत्वपूर्ण समय सक्रिय कल्ले निकलने की अवस्था है। इस चरण में नाइट्रोजन की उपलब्धता पौधों की बढ़वार और कल्ले बनने के लिए महत्वपूर्ण होती है, लेकिन खाद की मात्रा खेत की मिट्टी, किस्म, पहले दिए गए उर्वरक और स्थानीय अनुशंसा के आधार पर तय करनी चाहिए।
अगर लक्ष्य धान में अधिक और मजबूत कल्ले बनाना है तो केवल यूरिया बढ़ाने के बजाय संतुलित खाद प्रबंधन, समय पर खरपतवार नियंत्रण और सही जल प्रबंधन पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है। मिट्टी की जांच के आधार पर खाद देना लंबे समय में फसल की सेहत और उत्पादन दोनों के लिए अधिक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है।


