कपास की फसल किसानों की आय का बड़ा सहारा है लेकिन गुलाबी सुंडी, सफेद मक्खी, हरा तेला और थ्रिप्स जैसे कीट साल दर साल भारी नुकसान पहुंचाते रहते हैं। ये कीट समय रहते नियंत्रित न किए जाएं तो पैदावार और कपास की गुणवत्ता दोनों गिर जाती है। सही पहचान, नियमित निगरानी और सही समय पर स्प्रे से इनसे काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है।
इन कीटों की पहचान कैसे करें
गुलाबी सुंडी कपास की सबसे खतरनाक कीटों में से एक है। इसके लार्वा फूल और टिंडे के अंदर घुसकर रस चूसते हैं जिससे टिंडे सड़ने लगते हैं और कपास की गुणवत्ता खराब हो जाती है। सफेद मक्खी पत्तों की निचली सतह पर रहकर रस चूसती है और साथ में वायरस भी फैलाती है। हरा तेला यानी जासिड पत्तों को पीला करके ऊपर की तरफ मोड़ देता है जिसे हॉपर बर्न कहते हैं। थ्रिप्स छोटे कीट होते हैं जो नई पत्तियों और कलियों पर हमला करते हैं जिससे पौधे की बढ़वार रुक जाती है।
ये सभी कीट अलग-अलग समय पर सक्रिय होते हैं लेकिन कई बार एक साथ भी हमला करते हैं। शुरुआती अवस्था में नुकसान कम दिखता है लेकिन बाद में पूरा खेत प्रभावित हो सकता है। इसलिए नियमित खेत की जांच बहुत जरूरी है।
निगरानी से पहले से बचाव संभव
खेत की साप्ताहिक निगरानी सबसे अच्छा तरीका है। फेरोमोन ट्रैप लगाकर गुलाबी सुंडी के वयस्क पतंगों की संख्या पर नजर रखें। सफेद मक्खी के लिए पीले चिपचिपे ट्रैप उपयोगी साबित होते हैं। पत्तों की निचली सतह और टिंडों को खोलकर अंदर कीटों की जांच करते रहें। जब कीट आर्थिक क्षति स्तर से ऊपर पहुंच जाएं तभी दवा का छिड़काव करें। बिना जरूरत के स्प्रे करने से लाभकारी कीट भी मर जाते हैं और प्रतिरोध की समस्या बढ़ती है।
शुरुआती अवस्था में क्या करें
फसल की शुरुआती 60 दिनों तक नीम आधारित घोल या नीम तेल का छिड़काव अच्छा परिणाम देता है। खेत की साफ-सफाई रखें, पिछली फसल के अवशेष हटा दें और खरपतवार न उगने दें। बीटी कपास के साथ रिफ्यूजिया फसल लगाना भी मददगार होता है। गहरी जुताई से मिट्टी में छिपे कीट नष्ट हो जाते हैं। संतुलित खाद और सही सिंचाई से पौधा मजबूत रहता है जिससे कीट का हमला कम असरदार होता है।
सही स्प्रे से इन कीटों पर काबू
जब कीटों की संख्या बढ़ जाए तो अनुशंसित कीटनाशकों का इस्तेमाल करें। रस चूसक कीटों जैसे सफेद मक्खी, हरा तेला और थ्रिप्स के लिए एक अलग समूह की दवा और गुलाबी सुंडी के लिए दूसरे समूह की दवा का चयन करें। मिश्रण करते समय सावधानी बरतें और एक ही दवा बार-बार न डालें।
- सुबह या शाम के समय छिड़काव करें ताकि दवा का असर अच्छा रहे
- पत्तों की निचली सतह पर भी घोल पहुंचे इस बात का ध्यान रखें
- पानी की सही मात्रा में घोल बनाएं और स्टिकर मिलाकर इस्तेमाल करें
- आर्थिक क्षति स्तर पार होने के बाद ही स्प्रे करें
स्प्रे के बाद खेत की फिर से जांच जरूर करें। अगर प्रकोप कम हो गया हो तो दोबारा अनावश्यक छिड़काव से बचें।
अतिरिक्त सावधानियां याद रखें
बरसात के मौसम में स्प्रे के घोल में चिपचिपाहट बढ़ाने वाले पदार्थ मिलाएं ताकि दवा धुल न जाए। लाभकारी कीटों को बचाने के लिए व्यापक स्पेक्ट्रम कीटनाशकों का बहुत ज्यादा इस्तेमाल न करें। फसल कटाई के बाद अवशेषों को नष्ट कर दें ताकि अगले सीजन में कीट दोबारा न फैलें। क्षेत्रीय सलाह के अनुसार ही दवा चुनें क्योंकि अलग-अलग इलाकों में कीटों का व्यवहार थोड़ा अलग हो सकता है।
कपास की फसल को इन चार प्रमुख कीटों से बचाना मुश्किल नहीं है अगर समय पर सही कदम उठाए जाएं। नियमित निगरानी, साफ-सफाई और जरूरत पड़ने पर सही स्प्रे से पैदावार अच्छी रह सकती है और किसानों को नुकसान से बचाया जा सकता है। सही प्रबंधन से ही कपास की खेती लाभकारी बनी रहती है।


