फसल में ज्यादा फूल आना केवल मौसम और सिंचाई पर निर्भर नहीं करता, बल्कि सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इनमें बोरॉन ऐसा पोषक तत्व है जो फूल आने, परागण और फल बनने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
हालांकि बोरॉन का इस्तेमाल सही समय और सही मात्रा में करना जरूरी है। जरूरत से ज्यादा बोरॉन देने पर फसल को नुकसान भी हो सकता है, इसलिए फसल की स्थिति और मिट्टी की जरूरत को ध्यान में रखकर इसका प्रयोग करना चाहिए।
फूल आने से पहले बोरॉन देना क्यों महत्वपूर्ण है
पौधे में बोरॉन की पर्याप्त उपलब्धता होने पर फूलों के विकास और परागण से जुड़ी प्रक्रियाओं को बेहतर सहायता मिल सकती है। ICAR से संबंधित कृषि शोधों में भी बोरॉन को बेहतर परागण, बीज बनने और फल सेट के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।
खास तौर पर बोरॉन की कमी वाली मिट्टी में इसका महत्व और बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में पौधे में फूल और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए बोरॉन का प्रयोग केवल फूल दिखाई देने के बाद करने के बजाय फसल की जरूरत के अनुसार फूल आने से पहले या फूल बनने के शुरुआती चरण में करना अधिक उपयोगी हो सकता है।
बोरॉन देने का सही समय कब माना जाता है
बोरॉन के इस्तेमाल का कोई एक समय सभी फसलों के लिए समान नहीं होता। अलग-अलग फसलों में इसकी जरूरत और अनुशंसित अवस्था अलग हो सकती है। सामान्य तौर पर बोरॉन का पत्तियों पर छिड़काव प्री-फ्लावरिंग यानी फूल आने से पहले और फूल बनने की अवस्था में उपयोगी पाया गया है।
कृषि अनुसंधानों में कुछ फसलों में बोरॉन का छिड़काव फूल आने से पहले से लेकर फूल और फल बनने की अवस्था तक किया गया है। उदाहरण के लिए, कद्दू वर्गीय फसलों में फूल आने की अवधि तक बोरॉन के पत्तियों पर छिड़काव से बेहतर फल सेट देखा गया। इसका कारण पराग की सेहत और निषेचन की प्रक्रिया में बोरॉन की भूमिका को माना गया है।
इसलिए अगर किसान बोरॉन का इस्तेमाल कर रहे हैं तो केवल फूल आने के बाद देर से देने के बजाय फसल की अनुशंसित प्री-फ्लावरिंग अवस्था को ध्यान में रखना चाहिए।
बोरॉन का छिड़काव करते समय किन बातों का ध्यान रखें
बोरॉन की मात्रा बहुत कम होती है, लेकिन पौधे के लिए इसकी जरूरत महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि इसकी अधिक मात्रा देना सुरक्षित नहीं माना जाता। कृषि शोधों में भी यह पाया गया है कि अधिक बोरॉन देने से पौधों में विषाक्तता के लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
फसल के अनुसार उत्पाद और मात्रा बदल सकती है। इसलिए किसी एक फसल के लिए बताई गई मात्रा को दूसरी फसल में सीधे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
बोरॉन का प्रयोग करते समय इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
- पहले यह देखें कि फसल में बोरॉन की कमी की संभावना है या नहीं और जरूरत हो तो मिट्टी या पौधे की जांच कराएं।
- फूल आने से पहले या फसल की अनुशंसित फूल बनने की अवस्था में ही छिड़काव का समय तय करें।
- बाजार में उपलब्ध बोरॉन उत्पाद की लेबल पर दी गई मात्रा और फसल संबंधी सिफारिश का पालन करें।
- अधिक मात्रा में बोरॉन डालने से बचें, क्योंकि इसकी अधिकता पौधों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
हर फसल में एक जैसा बोरॉन नहीं देना चाहिए
यह समझना जरूरी है कि बोरॉन का इस्तेमाल फसल के नाम, मिट्टी की स्थिति और पौधे की अवस्था के आधार पर तय होता है। किसी सब्जी, दलहन, तिलहन, फलदार पौधे या फूल वाली फसल के लिए एक जैसी मात्रा और एक जैसा छिड़काव कार्यक्रम सही नहीं माना जा सकता।
उदाहरण के तौर पर, ICAR के कृषि अनुसंधान में कद्दू वर्गीय फसलों में पत्तियों पर बोरॉन के प्रयोग से फल संख्या और फल सेट में सुधार दर्ज किया गया है। वहीं अन्य फसलों पर हुए अध्ययनों में अलग-अलग सांद्रता और अलग-अलग विकास अवस्थाओं पर प्रयोग किए गए हैं। इससे साफ है कि बोरॉन का इस्तेमाल फसल-विशेष सिफारिश के अनुसार करना अधिक सुरक्षित है।
ज्यादा बोरॉन डालने से बंपर फूल की गारंटी नहीं
बोरॉन को फूल बढ़ाने वाली कोई ऐसी खाद नहीं समझना चाहिए जिसे ज्यादा मात्रा में देने पर फूलों की संख्या लगातार बढ़ती जाएगी। पौधे को इसकी बहुत कम मात्रा की जरूरत होती है और जरूरत से ज्यादा देने पर उल्टा नुकसान हो सकता है।
फूल आने के लिए संतुलित पोषण, पर्याप्त नमी, उचित तापमान, स्वस्थ पौधे और सही कृषि प्रबंधन भी जरूरी हैं। अगर मिट्टी में बोरॉन पहले से पर्याप्त है, तो केवल अतिरिक्त बोरॉन देने से जरूरी नहीं कि फूलों में उसी अनुपात में बढ़ोतरी हो।
इसीलिए बोरॉन का इस्तेमाल कमी की स्थिति और फसल की जरूरत के अनुसार करना ज्यादा वैज्ञानिक तरीका है।
सही समय और सही मात्रा से बेहतर परिणाम की उम्मीद
बोरॉन का सबसे महत्वपूर्ण फायदा उस स्थिति में मिल सकता है जब फसल में इसकी कमी हो या फसल की अवस्था में इसकी जरूरत बढ़ रही हो। फूल आने से पहले और फूल बनने के आसपास की अवस्था कई फसलों में महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन अंतिम समय और मात्रा फसल के अनुसार तय करनी चाहिए।
किसान यदि बोरॉन का छिड़काव करने की योजना बना रहे हैं तो पहले अपनी फसल की अनुशंसित अवस्था और उत्पाद की मात्रा की जांच करें। केवल अधिक फूल पाने के उद्देश्य से मनमाने तरीके से बोरॉन की मात्रा बढ़ाना उचित नहीं है।
कुल मिलाकर, बोरॉन का सही समय फसल की फूल आने वाली अवस्था से पहले या उसकी अनुशंसित प्री-फ्लावरिंग अवस्था के आसपास हो सकता है, लेकिन यह सभी फसलों के लिए एक जैसा नियम नहीं है। सही फसल, सही अवस्था और सही मात्रा में इस्तेमाल किया गया बोरॉन फूल, परागण और आगे बनने वाले फल या बीज की प्रक्रिया को बेहतर समर्थन दे सकता है।


