ट्रिपल सुपर फास्फेट (TSP) क्या है कब देना है? यह SSP, DAP, MAP से अलग क्यों है?

ट्रिपल सुपर फास्फेट (TSP) क्या है कब देना है? यह SSP, DAP, MAP से

खेती में फास्फोरस की जरूरत पूरी करने के लिए किसान आमतौर पर SSP और DAP जैसे उर्वरकों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन ट्रिपल सुपर फास्फेट यानी TSP भी फास्फोरस का एक प्रमुख उर्वरक है, जिसकी खासियत यह है कि इसमें नाइट्रोजन नहीं होती और फास्फोरस की मात्रा काफी अधिक होती है।

ऐसे में सवाल उठता है कि TSP आखिर क्या है, इसे फसल में कब देना चाहिए और SSP, DAP तथा MAP से यह किस तरह अलग है। सही अंतर समझना जरूरी है, क्योंकि केवल अधिक प्रतिशत वाला उर्वरक हर खेत के लिए बेहतर नहीं होता।

ट्रिपल सुपर फास्फेट यानी TSP क्या है?

ट्रिपल सुपर फास्फेट को संक्षेप में TSP कहा जाता है। इसे एक केंद्रित फास्फोरस उर्वरक माना जाता है। भारत में उर्वरक ग्रेड के रूप में TSP को 0-46-0 के रूप में दर्ज किया गया है, यानी इसमें लगभग 46 प्रतिशत P2O5 होता है और नाइट्रोजन तथा पोटाश नहीं होती।

यहां 46 प्रतिशत का मतलब यह नहीं है कि खाद में 46 प्रतिशत शुद्ध फास्फोरस मौजूद है। उर्वरकों पर फास्फोरस की मात्रा सामान्यतः P2O5 के रूप में बताई जाती है। इसलिए TSP को मुख्य रूप से फास्फोरस की जरूरत पूरी करने वाला उर्वरक समझना चाहिए।

TSP की सबसे बड़ी विशेषता इसकी उच्च फास्फोरस सांद्रता है। इसका उपयोग तब उपयोगी हो सकता है जब खेत में फास्फोरस की आवश्यकता हो लेकिन किसान उसी समय नाइट्रोजन नहीं देना चाहता।

फसल में TSP कब देना चाहिए?

फास्फोरस मिट्टी में नाइट्रोजन की तरह तेजी से इधर-उधर नहीं चलता। इसलिए फास्फोरस वाले उर्वरक को फसल की जड़ के पास और फसल की शुरुआती जरूरत को ध्यान में रखकर देना महत्वपूर्ण माना जाता है। कृषि विश्वविद्यालय की पोषक तत्व प्रबंधन जानकारी के अनुसार TSP को बुवाई या रोपाई से पहले अथवा उसके समय दिया जा सकता है।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर फसल में TSP की एक जैसी मात्रा या एक ही समय पर देना सही रहेगा। वास्तविक मात्रा फसल, मिट्टी की उर्वरता, पहले से मौजूद फास्फोरस और फसल की अनुशंसित पोषक तत्व जरूरत पर निर्भर करती है।

व्यावहारिक रूप से TSP का चुनाव तब अधिक समझदारी वाला हो सकता है जब खेत की जरूरत मुख्य रूप से फास्फोरस की हो और नाइट्रोजन की मात्रा अलग से नियंत्रित करनी हो।

SSP और TSP में सबसे बड़ा अंतर क्या है?

SSP यानी सिंगल सुपर फास्फेट और TSP दोनों फास्फोरस देने वाले उर्वरक हैं, लेकिन दोनों की संरचना एक जैसी नहीं है। भारत में SSP का सामान्य ग्रेड 0-16-0-11 है, यानी इसमें 16 प्रतिशत P2O5 और लगभग 11 प्रतिशत सल्फर दिया जाता है। दूसरी ओर TSP का ग्रेड 0-46-0-0 है।

इसलिए SSP की खासियत केवल फास्फोरस देना नहीं है। उससे सल्फर भी मिलता है। दूसरी तरफ TSP ज्यादा केंद्रित फास्फोरस देता है, लेकिन इसमें SSP जैसा सल्फर स्रोत नहीं होता।

इसी अंतर के कारण किसी खेत में SSP और किसी दूसरे खेत में TSP अधिक उपयुक्त हो सकता है। यदि खेत में फास्फोरस के साथ सल्फर की भी जरूरत है, तो SSP का पोषक योगदान अलग महत्व रखता है।

  • SSP में लगभग 16 प्रतिशत P2O5 और 11 प्रतिशत सल्फर होता है।
  • TSP में लगभग 46 प्रतिशत P2O5 होता है और नाइट्रोजन नहीं होती।
  • SSP से फास्फोरस के साथ सल्फर भी मिलता है।
  • TSP अधिक केंद्रित फास्फोरस स्रोत है।

DAP और MAP से TSP क्यों अलग है?

DAP यानी डाय-अमोनियम फॉस्फेट का भारत में सामान्य ग्रेड 18-46-0 है। इसका मतलब है कि DAP से फास्फोरस के साथ 18 प्रतिशत नाइट्रोजन भी मिलती है। वहीं MAP यानी मोनो-अमोनियम फॉस्फेट का सामान्य ग्रेड 11-52-0 है, जिसमें 11 प्रतिशत नाइट्रोजन और 52 प्रतिशत P2O5 होता है। TSP का ग्रेड 0-46-0 है, इसलिए उसमें नाइट्रोजन नहीं होती।

यही TSP की सबसे महत्वपूर्ण पहचान है। अगर किसान DAP का इस्तेमाल करता है तो फास्फोरस के साथ नाइट्रोजन भी खेत में जाती है। TSP में ऐसा नहीं होता। इसलिए TSP का इस्तेमाल पोषक तत्वों का संतुलन अलग तरीके से बनाने के लिए किया जा सकता है।

MAP में फास्फोरस की मात्रा TSP से अधिक होती है, लेकिन MAP के साथ भी नाइट्रोजन आती है। इस वजह से केवल P2O5 प्रतिशत देखकर खाद का चुनाव करना सही तरीका नहीं है।

चारों उर्वरकों को आसान भाषा में समझें

SSP, TSP, DAP और MAP चारों को केवल फास्फोरस की खाद मानकर एक-दूसरे का सीधा विकल्प समझना ठीक नहीं है। इनमें मिलने वाले पोषक तत्वों और उनकी मात्रा में अंतर है।

उर्वरकसामान्य ग्रेडमुख्य पोषक तत्व
SSP0-16-0-11फास्फोरस और सल्फर
TSP0-46-0-0मुख्य रूप से फास्फोरस
DAP18-46-0-0नाइट्रोजन और फास्फोरस
MAP11-52-0-0नाइट्रोजन और फास्फोरस

भारत में P&K उर्वरकों के लिए सरकारी रूप से सूचीबद्ध ग्रेड में SSP, DAP, MAP और TSP के ये सामान्य पोषक तत्व ग्रेड दर्ज हैं।

TSP लेने से पहले किसान को क्या देखना चाहिए?

किसान के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि खाद का चुनाव केवल इस आधार पर न किया जाए कि किस खाद में फास्फोरस प्रतिशत ज्यादा है। खेत की वास्तविक जरूरत देखना अधिक महत्वपूर्ण है।

यदि फसल को फास्फोरस के साथ नाइट्रोजन की भी जरूरत है तो DAP या MAP जैसी खाद का पोषण संयोजन अलग फायदा दे सकता है। अगर नाइट्रोजन को किसी दूसरे स्रोत से अलग मात्रा में देना है और फास्फोरस की जरूरत पूरी करनी है, तो TSP उपयोगी विकल्प बन सकता है। वहीं सल्फर की जरूरत वाले खेत में SSP का अतिरिक्त सल्फर महत्वपूर्ण हो सकता है।

इसलिए मिट्टी की जांच और फसल की अनुशंसित पोषक तत्व जरूरत के आधार पर उर्वरक का चुनाव करना अधिक उचित रहता है। जरूरत से ज्यादा फास्फोरस डालना भी सही कृषि प्रबंधन नहीं है।

क्या TSP हर फसल के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है?

TSP को विभिन्न फसलों में फास्फोरस स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। कृषि पोषक तत्व प्रबंधन संबंधी जानकारी में इसे सभी फसलों और सभी मिट्टियों के लिए उपयुक्त फास्फोरस उर्वरक बताया गया है, साथ ही अम्लीय मिट्टियों में जैविक खाद के साथ इसके उपयोग की सलाह दी गई है।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर फसल में किसान अपनी तरफ से एक निश्चित मात्रा डाल दे। उर्वरक की जरूरत फसल और मिट्टी के अनुसार बदलती है। विशेष रूप से पहले से पर्याप्त फास्फोरस वाली मिट्टी में बिना जरूरत अतिरिक्त फास्फोरस देना उचित नहीं माना जाना चाहिए।

निष्कर्ष

TSP यानी ट्रिपल सुपर फास्फेट मूल रूप से एक उच्च सांद्रता वाला फास्फोरस उर्वरक है, जिसका सामान्य ग्रेड 0-46-0 है। इसकी खासियत यह है कि इसमें नाइट्रोजन नहीं होती, इसलिए किसान फास्फोरस को अलग से दे सकता है और नाइट्रोजन की मात्रा को किसी दूसरे उर्वरक के जरिए अपनी जरूरत के अनुसार नियंत्रित कर सकता है।

SSP से TSP इसलिए अलग है क्योंकि SSP में फास्फोरस के साथ सल्फर भी मिलता है। DAP और MAP से इसका मुख्य अंतर यह है कि DAP और MAP में नाइट्रोजन भी होती है, जबकि TSP में नहीं होती। इसलिए कौन-सी खाद बेहतर है, इसका फैसला केवल फास्फोरस प्रतिशत देखकर नहीं बल्कि मिट्टी, फसल और पोषक तत्वों की वास्तविक जरूरत देखकर करना चाहिए।

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