बेल वाली सब्जियों में कई बार पौधे की बेल तो अच्छी बढ़ती है, लेकिन फल टेढ़े-मेढ़े, छोटे, कमजोर या चमक खोए हुए दिखाई देते हैं। लौकी, तोरई, करेला, खीरा और दूसरी कद्दूवर्गीय सब्जियों में फल की अच्छी बनावट के लिए संतुलित पोषण के साथ सही परागण और पर्याप्त नमी भी जरूरी होती है।
बोरॉन और कैल्शियम ऐसे पोषक तत्व हैं जिनकी कमी होने पर फूल और छोटे फलों के विकास पर असर पड़ सकता है। सही जरूरत होने पर इनका पत्तियों पर छिड़काव फल बनने और उसकी गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकता है, लेकिन इसे किसी भी हालत में ऐसा जादुई स्प्रे नहीं समझना चाहिए जो हर खेत में बिना कारण फल को सीधा और लंबा कर दे।
फल टेढ़े-मेढ़े होने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं
बेल वाली सब्जियों में फल का आकार केवल एक पोषक तत्व पर निर्भर नहीं करता। फूलों का सही परागण, पौधे में पानी की उपलब्धता, जड़ों की स्थिति, मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन और कीट या रोगों का प्रकोप, सभी फल के विकास को प्रभावित कर सकते हैं।
बोरॉन की कमी होने पर नए हिस्सों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है और फूल तथा छोटे फलों के विकास में परेशानी आ सकती है। दूसरी ओर कैल्शियम पौधे की कोशिकाओं और ऊतकों की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी कमी में नई पत्तियों और बढ़ते हिस्सों पर लक्षण दिखाई दे सकते हैं तथा छोटे फलों का सामान्य विकास प्रभावित हो सकता है।
इसलिए यदि पौधे में लगातार टेढ़े फल बन रहे हैं तो केवल स्प्रे करने के बजाय पूरे पौधे की स्थिति देखना जरूरी है। कई बार असमान सिंचाई या कमजोर परागण भी फल के आकार को बिगाड़ सकता है।
बोरॉन फल बनने में क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है
बोरॉन का संबंध फूलों के प्रजनन विकास और परागण से है। कद्दूवर्गीय फसलों में पर्याप्त बोरॉन होने पर परागकणों के अंकुरण और परागनलिका की वृद्धि जैसी प्रक्रियाओं को बेहतर समर्थन मिल सकता है। इसका सीधा संबंध अच्छी फल-सेटिंग से है।
कद्दूवर्गीय फसलों पर किए गए कृषि परीक्षणों में बोरॉन के पत्तियों पर छिड़काव से बेल की बढ़वार, फल बनने की संख्या और फल के आकार में सुधार देखा गया है, खासकर उन परिस्थितियों में जहां बोरॉन की कमी मौजूद थी।
बोरॉन की कमी के सामान्य संकेतों में नई पत्तियों का विकृत होना, बढ़ते हिस्से का कमजोर पड़ना और छोटे फलों का गिरना या उनका सामान्य रूप से विकसित न होना शामिल हो सकता है। हालांकि केवल इन लक्षणों के आधार पर कमी की अंतिम पुष्टि नहीं की जा सकती।
कैल्शियम फल की मजबूती और गुणवत्ता में कैसे मदद करता है
कैल्शियम पौधे की कोशिका भित्तियों की मजबूती और बढ़ते ऊतकों के सामान्य विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बेल वाली सब्जियों में इसकी पर्याप्त उपलब्धता पौधे के नए बढ़ते हिस्सों और फलों के सामान्य विकास के लिए उपयोगी होती है।
कैल्शियम की कमी होने पर नई पत्तियां विकृत या झुलसी हुई दिखाई दे सकती हैं और गंभीर स्थिति में बढ़ता हुआ हिस्सा प्रभावित हो सकता है। छोटे फल भी सामान्य तरीके से विकसित नहीं हो पाते।
यही वजह है कि फल बनने और तेजी से बढ़ने की अवस्था में कैल्शियम की उपलब्धता पर ध्यान देना उपयोगी होता है। लेकिन यह समझना भी जरूरी है कि केवल पत्तियों पर कैल्शियम का स्प्रे करने से हर स्थिति में समस्या ठीक नहीं होगी। यदि जड़ों तक पानी या कैल्शियम की उपलब्धता में समस्या है तो खेत की मूल स्थिति सुधारना भी जरूरी है।
बोरॉन और कैल्शियम का स्प्रे कब और कैसे करें
बोरॉन का छिड़काव सामान्य तौर पर उस अवस्था में अधिक उपयोगी माना जाता है जब पौधा फूल बनने और शुरुआती फल बनने की अवस्था में हो। कद्दूवर्गीय फसलों में बोरिक एसिड के कम सांद्रण वाले पत्तीय छिड़काव पर भी कृषि अनुसंधान में सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
कई कृषि सिफारिशों में बोरॉन की कमी वाली कद्दूवर्गीय फसलों के लिए 0.2 प्रतिशत बोरेक्स के पत्तीय छिड़काव का उल्लेख मिलता है। वहीं कुछ परीक्षणों में 25 पीपीएम बोरिक एसिड का उपयोग किया गया है। दोनों को एक जैसा मानकर एक ही मात्रा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि अलग-अलग उत्पादों में बोरॉन की मात्रा अलग होती है।
कैल्शियम के लिए भी उत्पाद के प्रकार और उसमें मौजूद वास्तविक कैल्शियम की मात्रा के अनुसार मात्रा तय करनी चाहिए। कैल्शियम नाइट्रेट, कैल्शियम सल्फेट या दूसरे कैल्शियम उत्पादों की सांद्रता एक जैसी नहीं होती।
इसलिए किसी तैयार कैल्शियम-बोरॉन उत्पाद को बिना लेबल देखे अलग से बोरेक्स या बोरिक एसिड के साथ मिलाकर छिड़काव करना सही तरीका नहीं है। ज्यादा बोरॉन पौधे के लिए नुकसानदेह हो सकता है। मिश्रण तभी करें जब संबंधित उत्पाद के लेबल या कृषि विशेषज्ञ की सिफारिश में उसकी अनुकूलता और मात्रा स्पष्ट हो।
स्प्रे करते समय इन बातों का रखें ध्यान
छिड़काव का समय भी परिणाम को प्रभावित करता है। तेज धूप और बहुत अधिक गर्मी में पत्तियों पर पोषक तत्वों का स्प्रे करने से बचना बेहतर रहता है। सुबह या शाम का समय सामान्य तौर पर पत्तीय छिड़काव के लिए अधिक उपयुक्त रहता है।
स्प्रे करते समय पत्तियों के दोनों तरफ घोल का समान रूप से पहुंचना जरूरी है, लेकिन पत्तियों से घोल टपकने की स्थिति तक अत्यधिक छिड़काव करने की जरूरत नहीं होती।
खेत में पोषक तत्वों का इस्तेमाल करने से पहले मिट्टी की स्थिति और पौधों के लक्षणों को देखना चाहिए। खासकर बोरॉन में अनुमान से ज्यादा मात्रा देने से बचना जरूरी है।
ध्यान रखने वाली प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:
- बोरॉन का छिड़काव फूल आने और शुरुआती फल बनने की अवस्था में जरूरत के अनुसार किया जा सकता है।
- कैल्शियम की मात्रा उत्पाद में मौजूद वास्तविक कैल्शियम और फसल की जरूरत के आधार पर तय करें।
- बोरॉन की अधिक मात्रा देने से बचें, क्योंकि इसकी कमी और अधिकता दोनों पौधे के लिए समस्या पैदा कर सकती हैं।
- कैल्शियम और बोरॉन के अलग-अलग उत्पादों को बिना संगतता जांचे एक ही टंकी में न मिलाएं।
केवल स्प्रे से फल सीधे और लंबे नहीं होंगे
यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। यदि पौधे में बोरॉन या कैल्शियम की कमी है तो सही पोषण देने से फल के विकास में सुधार हो सकता है, लेकिन फल की लंबाई और सीधाई केवल इन दोनों पोषक तत्वों पर निर्भर नहीं करती।
खीरा, करेला, लौकी और तोरई जैसी फसलों में फूलों का सही परागण बहुत महत्वपूर्ण है। कमजोर परागण से छोटे या असामान्य आकार के फल बन सकते हैं। इसी तरह पानी की कमी या बार-बार नमी में उतार-चढ़ाव होने पर फल का विकास प्रभावित हो सकता है।
बेल को पर्याप्त धूप मिलना, जड़ों के आसपास जलभराव न होना और खेत में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। कीटों और रोगों के कारण पत्तियां कमजोर होने पर पौधा फल को पर्याप्त पोषण नहीं दे पाता।
इसलिए यदि किसान बेहतर आकार और गुणवत्ता वाले फल चाहता है तो बोरॉन और कैल्शियम को पूरी खेती प्रबंधन व्यवस्था का हिस्सा समझना चाहिए, न कि अकेला समाधान।
सही पोषण के साथ सिंचाई और परागण पर भी दें ध्यान
फल बनने के समय पौधे को पानी की नियमित उपलब्धता चाहिए। बहुत लंबे अंतराल के बाद अचानक ज्यादा पानी देने से पौधे पर तनाव बढ़ सकता है। खेत की मिट्टी, मौसम और फसल की अवस्था के अनुसार सिंचाई का प्रबंधन करना जरूरी है।
परागण के लिए फूलों की स्थिति पर भी नजर रखें। बेल वाली सब्जियों में फूलों पर मधुमक्खियों और दूसरे परागण करने वाले कीटों की गतिविधि फल बनने में मदद करती है। फूलों की अवस्था में अनावश्यक रूप से कीटनाशकों का इस्तेमाल करने से परागण करने वाले कीट प्रभावित हो सकते हैं।
इसके साथ पौधे में पत्तियों की संख्या और बेल की सेहत भी अच्छी रहनी चाहिए। स्वस्थ पत्तियां ही प्रकाश संश्लेषण के जरिए फल के विकास के लिए आवश्यक ऊर्जा तैयार करती हैं।
किसान के लिए आसान निष्कर्ष
बेल वाली सब्जियों में सीधे, लंबे और अच्छी गुणवत्ता वाले फल पाने के लिए बोरॉन और कैल्शियम उपयोगी पोषक तत्व हो सकते हैं, खासकर तब जब पौधे में इनकी कमी हो। बोरॉन फूलों और फल-सेटिंग की प्रक्रिया को सहारा देता है, जबकि कैल्शियम बढ़ते ऊतकों और कोशिका संरचना की मजबूती के लिए जरूरी है।
लेकिन किसी भी पोषक तत्व को जरूरत से ज्यादा देना सही नहीं है। विशेष रूप से बोरॉन की मात्रा में सावधानी जरूरी है। बेहतर परिणाम के लिए फसल की अवस्था, मिट्टी की स्थिति और उत्पाद के लेबल के अनुसार मात्रा तय करनी चाहिए।
अगर फल लगातार टेढ़े बन रहे हैं तो केवल बोरॉन और कैल्शियम का स्प्रे करने के बजाय सिंचाई, परागण, मिट्टी की उर्वरता, कीट और रोग की स्थिति को भी जांचें। सही समय पर सही पोषण और संतुलित खेती प्रबंधन अपनाने पर बेल वाली सब्जियों में फल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को बेहतर करने की संभावना बढ़ती है।


