सोयाबीन की फसल में पौधों की बढ़वार, फूल आने और फलियां बनने के समय PGR यानी Plant Growth Regulator का इस्तेमाल किसानों के बीच चर्चा में रहता है। खासकर ताबोली, चमत्कार और लिहोसिन जैसे नामों को लेकर यह सवाल सामने आता है कि इनमें से कौन-सा PGR सोयाबीन में इस्तेमाल किया जा सकता है, किस अवस्था में करना चाहिए और मात्रा कितनी होनी चाहिए।
सबसे जरूरी बात यह है कि हर PGR को केवल उसके नाम से नहीं चुनना चाहिए। एक ही तरह दिखने वाले उत्पादों में अलग-अलग सक्रिय तत्व और अलग-अलग फसल सिफारिश हो सकती है। इसलिए सोयाबीन में PGR का चुनाव उत्पाद के सक्रिय तत्व, पंजीकृत उपयोग और लेबल पर दी गई मात्रा के आधार पर करना अधिक सुरक्षित है।
सोयाबीन में PGR की जरूरत कब पड़ती है
PGR का काम सामान्य खाद या कीटनाशक जैसा नहीं होता। इनका उद्देश्य पौधे की प्राकृतिक बढ़वार को एक खास दिशा में नियंत्रित करना होता है। सोयाबीन में यदि पौधों में जरूरत से ज्यादा शाकीय बढ़वार हो रही हो और पौधा पत्तियों तथा तनों की ओर अधिक ऊर्जा लगा रहा हो, तो कुछ PGR का उपयोग पौधे की बढ़वार और प्रजनन अवस्था के संतुलन के लिए किया जाता है।
फूल आने की अवस्था इस मामले में महत्वपूर्ण होती है। इसी समय पौधे की ऊर्जा फूल और आगे चलकर फलियों के विकास की ओर जाने लगती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर खेत में फूल आते ही PGR का छिड़काव जरूरी हो जाता है। फसल की वास्तविक स्थिति, मौसम, पौधों की बढ़वार और संबंधित उत्पाद की स्वीकृत फसल सिफारिश को देखना जरूरी है।
PGR का गलत समय या अधिक मात्रा में इस्तेमाल पौधे की सामान्य बढ़वार को जरूरत से ज्यादा रोक सकता है। इसलिए केवल अधिक शाखाएं, गहरा हरा रंग या ज्यादा बढ़वार देखकर PGR का इस्तेमाल करने के बजाय खेत की स्थिति के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।
चमत्कार में सोयाबीन के लिए क्या सिफारिश है
चमत्कार नाम से बाजार में अलग-अलग उत्पाद भी मिल सकते हैं, इसलिए यहां उस उत्पाद की बात हो रही है जिसमें Mepiquat Chloride 5% AS सक्रिय तत्व है। इस formulation की सोयाबीन के लिए दर्ज सिफारिश फूल आने की अवस्था में एक छिड़काव की है। इसका उद्देश्य जरूरत से ज्यादा शाकीय बढ़वार को नियंत्रित करना और फसल की उत्पादक क्षमता को बेहतर दिशा देना है।
इस formulation के लिए सोयाबीन में 62.5 ग्राम सक्रिय तत्व के बराबर 1.25 लीटर formulation प्रति हेक्टेयर और 500 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर की सिफारिश दर्ज है। इसे एकड़ में देखें तो formulation की मात्रा लगभग 500 मिलीलीटर प्रति एकड़ और पानी लगभग 200 लीटर प्रति एकड़ बैठता है। छिड़काव फूल आने की अवस्था में किया जाता है।
इसका मतलब यह है कि यदि किसान के पास वास्तव में Mepiquat Chloride 5% AS वाला वही formulation है, तभी ऊपर दी गई मात्रा को आधार बनाया जा सकता है। केवल बोतल पर “चमत्कार” नाम देखकर मात्रा तय करना सही तरीका नहीं है, क्योंकि बाजार में समान नाम वाले अलग उत्पाद भी हो सकते हैं।
ताबोली को लेकर सबसे जरूरी सावधानी
ताबोली में Paclobutrazol 40% SC सक्रिय तत्व है। उपलब्ध वर्तमान उत्पाद जानकारी और पंजीकृत लेबल में इसका उपयोग Pigeon Pea यानी अरहर के लिए फूल आने की शुरुआत पर दिया गया है। इसकी दर्ज मात्रा 75 मिलीलीटर formulation प्रति हेक्टेयर है, जो लगभग 30 मिलीलीटर प्रति एकड़ के बराबर होती है और पानी की मात्रा 500 लीटर प्रति हेक्टेयर दी गई है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। बाजार में कई जगह ताबोली को सोयाबीन के साथ जोड़कर बताया जाता है, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक लेबल में Paclobutrazol 40% SC वाले ताबोली की स्पष्ट फसल सिफारिश अरहर के लिए है। लेबल पर यह भी स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि निर्धारित फसल के अलावा इसका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
इसलिए सोयाबीन में ताबोली की मात्रा 30 या 40 मिलीलीटर प्रति एकड़ बताकर सीधे छिड़काव की सलाह देना सही नहीं होगा। सोयाबीन के लिए उत्पाद के वर्तमान लेबल पर स्पष्ट स्वीकृति न होने की स्थिति में किसान को इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए।
लिहोसिन के मामले में क्यों जरूरी है लेबल देखना
लिहोसिन का सक्रिय तत्व Chlormequat Chloride 50% SL है। इसका उद्देश्य पौधे की अनावश्यक या अत्यधिक शाकीय बढ़वार को नियंत्रित करना है। हालांकि बाजार में उपलब्ध कई विक्रेता विवरणों में लिहोसिन को सोयाबीन के लिए 150 से 250 मिलीलीटर प्रति एकड़ और फूल आने के आसपास इस्तेमाल करने की जानकारी दी जाती है, वर्तमान निर्माता जानकारी में लिहोसिन के उपयोग के लिए सोयाबीन का नाम स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध नहीं है।
इसी वजह से सोयाबीन में लिहोसिन की कोई एक मात्रा देखकर उसे सार्वभौमिक सिफारिश मानना उचित नहीं है। PGR में formulation की सांद्रता, फसल और उपयोग की अवस्था का सीधा संबंध होता है। यदि किसान के पास लिहोसिन है, तो उसे उसी पैक पर दिए गए वर्तमान लेबल और कृषि विशेषज्ञ की फसल-विशिष्ट सलाह के अनुसार ही उपयोग करना चाहिए।
तीनों PGR को एक जैसा क्यों नहीं समझना चाहिए
ताबोली, चमत्कार और लिहोसिन तीन अलग सक्रिय तत्वों से जुड़े उत्पाद हैं। Paclobutrazol, Mepiquat Chloride और Chlormequat Chloride पौधे की बढ़वार को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग तरीके से काम करते हैं। इसलिए एक उत्पाद की मात्रा को दूसरे उत्पाद में बदलकर इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है।
सोयाबीन में PGR चुनते समय किसान को मुख्य रूप से इन बातों पर ध्यान देना चाहिए:
- उत्पाद का पूरा नाम और सक्रिय तत्व क्या है।
- formulation की प्रतिशत मात्रा क्या है।
- सोयाबीन के लिए उस formulation की स्वीकृत सिफारिश है या नहीं।
- लेबल पर दी गई फसल अवस्था, मात्रा और पानी की मात्रा क्या है।
इन बातों में से किसी एक को नजरअंदाज करके केवल दुकानदार की बताई मात्रा या दूसरे किसान के खेत में इस्तेमाल हुई मात्रा को अपनाना उचित नहीं है।
फूल आने के समय PGR डालने का मतलब क्या है
सोयाबीन में फूल आने के समय पौधे की बढ़वार और प्रजनन विकास के बीच संतुलन महत्वपूर्ण हो जाता है। Mepiquat Chloride 5% AS के लिए सोयाबीन में दर्ज उपयोग भी इसी अवस्था से जुड़ा है और इसका उद्देश्य अत्यधिक शाकीय बढ़वार को नियंत्रित करना बताया गया है।
लेकिन PGR किसी कमजोर या तनावग्रस्त फसल को अचानक अच्छी फसल में बदलने वाला उत्पाद नहीं है। यदि खेत में पानी की कमी, जलभराव, पोषक तत्वों की कमी, कीट या रोग का दबाव जैसी समस्या है, तो पहले उस समस्या को पहचानना जरूरी है। ऐसी स्थिति में केवल PGR डालने से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सकते।
इसी तरह बहुत ज्यादा बढ़वार देखकर मात्रा बढ़ा देना भी सही नहीं है। PGR का असर मात्रा और फसल अवस्था दोनों से जुड़ा होता है। इसलिए निर्धारित मात्रा से अधिक प्रयोग करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
सोयाबीन में सही PGR चुनने का आसान निष्कर्ष
उपलब्ध पंजीकृत उपयोग और उत्पाद जानकारी को देखें तो तीनों नामों के बीच महत्वपूर्ण अंतर सामने आता है। Mepiquat Chloride 5% AS formulation वाले चमत्कार की सोयाबीन में फूल आने की अवस्था पर स्पष्ट सिफारिश मिलती है। इसके विपरीत Paclobutrazol 40% SC वाले ताबोली की उपलब्ध आधिकारिक सिफारिश अरहर के लिए है, इसलिए उसे सोयाबीन में उसी मात्रा से इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी जा सकती।
लिहोसिन के मामले में भी बाजार में सोयाबीन के लिए अलग मात्रा संबंधी जानकारी मिलती है, लेकिन वर्तमान निर्माता की उपलब्ध जानकारी में सोयाबीन स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध नहीं है। इसलिए केवल बाजार में चल रही मात्रा के आधार पर इसका इस्तेमाल करना उचित नहीं होगा।
किसान के लिए सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि PGR का चुनाव ब्रांड नाम से नहीं, बल्कि सक्रिय तत्व और सोयाबीन के लिए दर्ज वर्तमान उपयोग के आधार पर किया जाए। जिस उत्पाद के लेबल पर सोयाबीन की स्पष्ट सिफारिश हो, उसी की निर्धारित मात्रा और सही फसल अवस्था में छिड़काव करना चाहिए।
निष्कर्ष
सोयाबीन में PGR का इस्तेमाल तभी फायदेमंद हो सकता है जब जरूरत, फसल की अवस्था और उत्पाद की सही सिफारिश तीनों एक साथ मिलें। फूल आने का समय महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन हर खेत में एक जैसा PGR या एक जैसी मात्रा लागू नहीं की जा सकती।
ताबोली, चमत्कार और लिहोसिन को एक ही श्रेणी का समझकर उनकी मात्रा आपस में बदलना किसान के लिए नुकसानदायक हो सकता है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर Mepiquat Chloride 5% AS वाले चमत्कार की सोयाबीन में फूल आने पर 500 मिलीलीटर प्रति एकड़ और लगभग 200 लीटर पानी प्रति एकड़ की स्पष्ट सिफारिश मिलती है। वहीं ताबोली के Paclobutrazol 40% SC formulation की उपलब्ध आधिकारिक सिफारिश अरहर के लिए है, जबकि लिहोसिन के लिए सोयाबीन संबंधी बाजार की जानकारी और वर्तमान निर्माता जानकारी में अंतर दिखाई देता है।
इसलिए सोयाबीन में PGR का सही नियम यही है: पहले सक्रिय तत्व और लेबल देखें, फिर फसल की अवस्था पहचानें और उसके बाद ही निर्धारित मात्रा में छिड़काव करें। केवल ज्यादा फूल या ज्यादा उत्पादन की उम्मीद में PGR की मात्रा बढ़ाना सही खेती नहीं है।


