धान में दूसरा खाद डालने का सही समय! यही फॉर्मूला देगा जबरदस्त फुटाव और घनी फसल

धान में दूसरा खाद डालने का सही समय! यही फॉर्मूला देगा

धान की फसल में सही समय पर खाद देना पैदावार बढ़ाने का सबसे अहम कदम होता है। खासकर दूसरी खाद का समय अगर सही न हो तो पौधों में कल्ले कम निकलते हैं और फसल पतली रह जाती है। सही समय और सही तरीके से दी गई दूसरी खुराक से पौधों में जोरदार फुटाव होता है और खेत घना दिखाई देने लगता है।

रोपाई के बाद दूसरी खाद का सही समय क्यों जरूरी है

धान की रोपाई के बाद पौधे जड़ें जमाते हैं और फिर कल्ले निकलने की प्रक्रिया शुरू होती है। इसी दौरान नाइट्रोजन की जरूरत सबसे ज्यादा बढ़ जाती है। अगर दूसरी खाद देर से दी जाए तो कल्लों की संख्या कम रह जाती है। जल्दी डालने पर भी खाद का पूरा फायदा नहीं मिल पाता क्योंकि पौधे अभी पूरी तरह तैयार नहीं होते। रोपाई के करीब 20 से 30 दिन बाद का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान फसल सक्रिय कल्ले निकलने की अवस्था में होती है।

इस समय कौन सी खाद और कितनी मात्रा सही रहती है

दूसरी खुराक में मुख्य रूप से यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि इसमें नाइट्रोजन भरपूर मात्रा में होता है। प्रति एकड़ करीब 25 से 35 किलोग्राम यूरिया डालना आमतौर पर पर्याप्त रहता है। मिट्टी की जांच के आधार पर थोड़ी मात्रा कम या ज्यादा की जा सकती है। अगर खेत में जिंक की कमी के लक्षण दिख रहे हों तो जिंक सल्फेट की थोड़ी मात्रा भी मिलाई जा सकती है। पोटाश की आधी मात्रा अगर पहले नहीं दी गई हो तो इस समय थोड़ी मात्रा शामिल करने से पौधों की मजबूती बढ़ती है।

खाद डालते समय इन बातों का खास ध्यान रखें

खाद डालने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना समय। खेत में पानी बहुत गहरा न हो। हल्की नमी या दो से तीन सेंटीमीटर पानी होना सबसे अच्छा माना जाता है। गहरे पानी में यूरिया घुलकर बह सकता है या नीचे चला जाता है। सुबह या शाम के समय खाद डालना बेहतर रहता है क्योंकि तेज धूप में नाइट्रोजन उड़ने का खतरा बढ़ जाता है। खाद डालने के बाद हल्की सिंचाई करने से पोषक तत्व जड़ों तक अच्छी तरह पहुंचते हैं।

  • खेत में खरपतवार साफ रखें ताकि खाद का पूरा लाभ पौधों को मिले
  • यूरिया को समान रूप से पूरे खेत में बिखेरें
  • तेज हवा या बारिश की आशंका हो तो खाद डालने से बचें
  • पौधों के रंग और बढ़वार को देखकर मात्रा में हल्का बदलाव कर सकते हैं

दूसरी खाद से पौधों में क्या बदलाव आता है

सही समय पर दी गई दूसरी खुराक से पौधों का रंग गहरा हरा हो जाता है। नए कल्ले तेजी से निकलने लगते हैं और हर पौधे में कल्लों की संख्या बढ़ जाती है। इससे फसल घनी दिखती है और बाद में बालियों की संख्या भी ज्यादा होती है। मजबूत कल्ले होने से पौधे गिरने की संभावना भी कम हो जाती है। इस अवस्था में पोषक तत्व सही मात्रा में मिलने से आगे की बालियां बनने की प्रक्रिया भी बेहतर होती है।

आम गलतियां जो किसान अक्सर कर बैठते हैं

बहुत से किसान दूसरी खाद बहुत जल्दी या बहुत देर से डाल देते हैं। कुछ लोग एक साथ बहुत ज्यादा यूरिया डाल देते हैं जिससे पौधे लंबे तो हो जाते हैं लेकिन कमजोर रह जाते हैं। खेत में पानी भरा होने पर खाद डालना भी नुकसानदायक साबित होता है। जिंक और फास्फोरस वाली खाद को एक साथ मिलाने से भी पोषक तत्व सही तरीके से काम नहीं करते। इन गलतियों से बचकर ही अच्छा परिणाम मिलता है।

सही प्रबंधन से मिलने वाले फायदे

जब दूसरी खाद सही समय पर और सही तरीके से दी जाती है तो फसल में कल्लों की संख्या बढ़ती है। पौधे मजबूत रहते हैं और रोगों का प्रकोप भी कम होता है। घनी फसल होने से सूरज की रोशनी का सही उपयोग होता है और बाद में दानों का भराव भी अच्छा होता है। कुल मिलाकर पैदावार में अच्छी बढ़ोतरी देखी जाती है। मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए भी यह तरीका मददगार साबित होता है।

धान की फसल में दूसरी खाद का सही समय और सही मात्रा अपनाने से किसान आसानी से बेहतर फुटाव और घनी फसल हासिल कर सकते हैं। रोपाई के 20 से 30 दिन बाद का यह महत्वपूर्ण चरण अगर ध्यान से संभाला जाए तो फसल की पूरी संभावनाएं खुल जाती हैं। समय पर सही कदम उठाकर अच्छी पैदावार की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

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